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बापू तेरे सपनों का भारत .......................................... देश है आजाद ,देशवासी गुलाम है , नेताओं के हाथ में , भारत की लगाम है, अपनों से ही मतलब इनको, औरो से भला क्या काम है ? अबला नारियों से कर रहे हैं सब शरारत । बापू ! ये है , तेरे सपनों का भारत ।। अहिंसा मिट गई हिंसा की ज्वाला में , सत्य हार गया घोटाला ही घोटाला में , अत्याचारियों के हौसले है बुलंद , बाकी का जीना है कसाला में , इमानदारी लगती है हर जगह नदारद । बापू ! ये है , तेरे सपनों का भारत ।। कल्पना थी तेरी राम राज्य बनाने की , तैयारियां चल रही है यहाँ , रावण को फिर बुलाने की , कोशिश है राम न आ जाए कहीं , इससे पहले सीता को उठाने की , हर सीता सोंच रही है , ये कैसी है कयामत ? बापू ! ये है , तेरे सपनों का भारत ।। यहाँ अपनों में ही होती है लड़ाई , तूने पराये को भी कहना सिखाया था भाई , जाति-धर्म के नाम पर बंट गए , तेरे हिंदू-मुस्लिम, सिख -इसाई , तो क्यों न गिरेगी, भारत -रुपी इमारत । बापू ! ये है , तेरे सपनों का भारत ।। आज है जरुरत भारत को तेरी , कब आएगा तू बोल दे तो सही, ऐसा ध हो कि तुझे आ...